सांड की व्यथा


 हम युवाओं की तरह आज कल सांड भी बेरोजगार घूम रहे है,हम तो फिर भी अपनी बेरोजगारी को कमरे के एक कोने में झेल ले रहे है परन्तु सांड गलियों,चौराहों,सड़कों व दुकानों के सामने किनारे खड़ी द्विपहिया वाहन पर ही चढ़ के अपने अंदर की अश्लीलता निकाल रहे है, परिणाम कुछ यूं हुआ है कि अनगिनत वाहनों के बत्ती, बगल की बत्ती, व बगल के शीशे सांड के चढ़ने से टूट जा रहे है यही नहीं कहीं - कहीं तो सांड स्वयं सांड के ऊपर चढ़ता हुआ नजर आ जाता है,,,..

अब आखिर बेचारे ये सांड करे भी तो क्या करे आज के इस दौर में विज्ञान ने इतना प्रगति कर लिया है कि अच्छी नस्ल व बछिया की प्राप्ति के लिए गायो को वैज्ञानिक तकनीकी से प्रजनन कर दिया जा रहा है,,, जो आपके नजरिए से तो सही परन्तु एक सांड के नजरिए से उनके ज़िन्दगी का एक अमूल्य उम्र उनसे छीन लिया जा रहा है,।

आप स्वयं ही विचार कीजिए "अगर मनुष्यो के साथ भी ऐसा होने लगेगा तो आप क्या करेंगे??
                       
  खैर भगवान ने आपको दो हाथ भी दिए है जिसका उपयोग आप कर सकते हैं साथ ही विज्ञान भी कुछ ऐसे उपकरण का निर्माण किया है जिसका प्रयोग भी आप कर सकते है....
परन्तु एक सांड के लिए क्या किया गया है???
क्या ये अन्याय नहीं हो रहा एक जीव के साथ?
हमारे संविधान में अनुच्छेद १९-२२(स्वतंत्रता का अधिकार) में लिखा गया है - भारत में हर कोई अपने कार्य को करने के लिए स्वतंत्र है,तो फिर कहा है इस जीव(सांड) की स्वतंत्रता.????

अगर भगवान ने आपको दो हाथ और विज्ञान ने उपकरण ना दिया होता तो सांड और आप में कोई फर्क ना रह जाता और आप भी सांड जैसी करतूतों को दोहराने लगते......!!!!

आप सभी महनुभवो द्वारा सांड जी की इस व्यथा को मै सरकार तक पहुंचाने की गुजारिश करता हूं, और उम्मीद करता हूं कि आप इनके हित में अवश्य कुछ सोचेंगे और करेंगे।

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